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History Of Hamirpur District

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History Of Hamirpur District


||History Of Hamirpur District||Hamirpur District History||

History Of Hamirpur District
History Of Hamirpur District


1. हमीरपुर की स्थापना – 1700 ई. में आलम चंद की मृत्यु के बाद हमीर चंद काँगड़ा के शासक बने | उस समय काँगड़ा किला मुगलों के अधीन था | हमीरचंद ने 1700 ई. से लेकर 1747 ई. तक काँगड़ा रियासत पर शासन किया | हमीरचंद ने 1743 ई. में जिस स्थान पर एक किले का निर्माण किया, वहीं स्थान कालांतर में हमीरपुर कहलाया | हमीरपुर किले को 1884 ई. में तहसील कार्यालय बनाया गया | इस प्रकार हमीरपुर को नादौन के स्थान पर 1868 ई. में तहसील मुख्यालय बनाया गया |

2. सुजानपुर टीहरा – 1748 ई.में काँगड़ा के राजा अभयचंद ने सुजानपुर की पहाड़ियों पर दुर्ग और महल बनवाएं जो टीहरा के नाम से प्रसिद्ध हुए | सुजानपुर शहर की स्थापना घमण्डचंद ने की थी | घमण्डचंद ने 1761 ई. में सुजानपुर में चामुण्डा मंदिर का निर्माण करवाया | काँगड़ा के राजा संसारचंद ने सुजानपुर टीहरा को अपनी राजधानी बनाया | राजा संसारचंद ने 1793 ई. में सुजानपुर में गौरी शंकर मंदिर का निर्माण करवाया | सुजानपुर का नर्वदेश्वर मंदिर 1823 ई. में संसारचंद द्वारा बनवाया गया | राजा संसारचंद ने सुजानपुर टीहरा में ब्रज जैसी होली का त्योहार शुरू करवाया | सुजानपुर टीहरा की 1820 ई. में विलियम मूरक्राफ्ट और जॉर्ज ट्रिवेक ने यात्रा की | सुजानपुर टीहरा में हिमाचल प्रदेश का एकमात्र सैनिक स्कूल स्थित है | सुजानपुर टीहरा में हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा खेल मैदान हैं |


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3. नादौन – नादौन शहर ब्यास नदी के किनारे बसा है | इस स्थान पर 1687 ई. में गुरु गोविन्द सिंह और बिलासपुर के राजा भीमचंद ने मुगलों पर हराया था | यह युद्ध नादौन युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है | काँगड़ा के राजा संसारचंद ने नादौन के पास अमतर को अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया | संसारचंद ने नादौन के बारे में कहा था “आएगा नादौन जाएगा कौन” | राजा संसारचंद ने मण्डी के राजा ईश्वरी सेन को 12 वर्षों तक नादौन जेल में कैद रखा जिसे बाद में गोरखाओं ने छुड़वाया |मूरक्राफ्ट ने 1820 ई. में नादौन की यात्रा की | नादौन को 1846 ई. में तहसील मुख्यालय बनाया गया | यशपाल साहित्य प्रतिष्ठान की स्थापना 2000 ई. में नादौन में की गई |

4. महलमोरियो -हमीरपुर के महलमोरियो में 1806 ई. में गोरखों ने महाराजा संसारचंद को हराया जिसके बाद संसारचंद को काँगड़ा किले में शरण लेनी पड़ी | हमीरपुर 1806 से 1846 ई. तक सिक्खों के नियंत्रण में था | 1846 ई. में हमीरपुर अंग्रेजों के अधीन आ गया |

5. भुम्पल – साहित्यकार यशपाल का जन्म भुम्पल में हुआ | यशपाल 1918 ई. में स्वाधीनता संग्राम में कूदे थे |

6. विक्टोरिया क्रॉस – हमीरपुर केलान्स नायक लाला राम को प्रथम विश्वयुद्ध में अदम्य साहस के लिए विक्टोरिया क्रॉस प्रदान किया गया | वे विक्टोरिया क्रॉस प्राप्त करने वाले पहले हिमाचली हैं |

7. जिले का निर्माण – हमीरपुर जिला 1966 ई. से पूर्व पंजाब का हिस्सा था | हमीरपुर काँगड़ा जिले की तहसील के रूप में 1966 ई. में हिमाचल प्रदेश में मिलाया गया | हमीरपुर को 1 सितम्बर, 1972 को काँगड़ा से अलग कर जिला बनाया गया | हमीरपुर जिला बनने से पूर्व (1972 ई.) काँगड़ा जिले का उपमण्डल था | हमीरपुर और बड़सर 2 तहसीलों से हमीरपुर जिले का गठन किया गया | वर्ष 1980 ई. में सुजानपुर टीहरा, नादौन और भोरंज तहसील का गठन किया गया |

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